इटावा | 14 अप्रैल, 2026 जिलाधिकारी शुभरान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी द्वारा बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि देने के साथ हुआ।

“शिक्षित बनो” के मूल मंत्र पर दिया जोर
समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने बाबा साहेब के संघर्षमय जीवन और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा:
शिक्षा सर्वोपरि: बाबा साहब का मूल मंत्र था— “दो रोटी कम खाओ, लेकिन बच्चों को शिक्षा अवश्य दिलाओ।” जो पढ़ेगा, वही बढ़ेगा।
समानता का संदेश: उन्होंने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और छुआछूत की बेड़ियों को तोड़कर सभी को समानता का अधिकार दिलाया। उनके लिए न कोई छोटा था और न कोई बड़ा।
पंचतीर्थ की महत्ता: जिलाधिकारी ने बाबा साहेब से जुड़े ‘पंचतीर्थ’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज के हर वर्ग— गरीब, महिला, नौजवान और किसान के हक के लिए संघर्ष किया।
”डॉ. अंबेडकर के विचारों पर चलना और उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।” — कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी
संघर्ष से संविधान निर्माण तक का सफर

जिलाधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश के महू में जन्मे बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों और छुआछूत जैसी कुरीतियों का सामना करते हुए अपनी शिक्षा पूरी की। वह अपनी विद्वता के कारण ही संविधान निर्माता समिति के अध्यक्ष बने और स्वतंत्र भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने में अतुलनीय भूमिका निभाई।


