इटावा (उत्तर प्रदेश):
जनपद के इकदिल थाना क्षेत्र के बिरारी गांव में रेलवे कार्य के नाम पर जारी अनुज्ञप्ति पत्र (परमिशन लेटर) की आड़ में मिट्टी के अवैध खनन और परिवहन का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि रेलवे कार्य के नाम पर मिली प्रशासनिक अनुमति का दुरुपयोग करते हुए खनन माफिया आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं।
दर्जनों डंपर और JCB मशीनें दिन-रात सक्रिय

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिरारी क्षेत्र में दर्जनों डंपर और कई JCB मशीनों को बेखौफ होकर अवैध खनन में लगाया गया है। लगातार हो रहे इस परिवहन से न सिर्फ सरकारी राजस्व को चूना लग रहा है, बल्कि स्थानीय रास्तों और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है।
प्लॉटिंग के भराव में खपाई जा रही है मिट्टी
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे कार्य के नाम पर खोदी जा रही यह मिट्टी मनियामऊ और पिलखर क्षेत्र में चल रही अवैध प्लॉटिंग के भराव के लिए पहुंचाई जा रही है। बताया जा रहा है कि विभाग द्वारा लगभग 11 हजार घन मीटर मिट्टी की अनुमति दी गई थी, लेकिन मौके पर तय मात्रा से कई गुना अधिक खनन होने की आशंका जताई जा रही है।
कागजातों की आड़ में माफियाओं का ‘मास्टरस्ट्रोक’
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब भी कोई इस अवैध कार्य का विरोध करता है या पूछताछ करता है, तो खनन माफिया अलग-अलग बहाने बनाते हैं। कार्रवाई से बचने के लिए ये माफिया कभी रेलवे की परमिशन, कभी ईंट-भट्टों के कागजात, तो कभी बेसमेंट खुदाई की अनुमति का सहारा लेकर खुलेआम इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।
शिकायतों के बाद भी महकमा सुस्त
इस पूरे मामले की जानकारी ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं द्वारा कई बार खनन विभाग और संबंधित खनन अधिकारी को दी जा चुकी है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से कोई प्रभावी या ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने अब इस मामले में जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।


