आशीष श्रीवास्तव
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में भ्रष्टाचार का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ तैनात जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) बनवारी लाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें वे एक पंचायत सचिव से खुलेआम रिश्वत लेते नजर आ रहे हैं। इस खुलासे के बाद जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में डीपीआरओ बनवारी लाल एक पंचायत सचिव से ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित सचिव से उसकी पसंद की जगह पोस्टिंग देने के बदले कुल 40 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसकी पहली किस्त देते समय यह वीडियो चुपके से रिकॉर्ड कर लिया गया।
वीडियो में ‘2 लाख’ के ऑफर का जिक्र

वायरल वीडियो में डीपीआरओ सिर्फ रिश्वत लेते ही नहीं, बल्कि सौदेबाजी करते भी सुनाई दे रहे हैं। वे कहते दिख रहे हैं कि “ताखा (ब्लॉक) की पोस्टिंग के लिए जय किशन 2 लाख रुपये दे रहा था, लेकिन मैंने उसे मना कर दिया।” इस बयान से यह स्पष्ट हो रहा है कि विभाग में पोस्टिंग का बाकायदा ‘रेट कार्ड’ चल रहा है।
सपा सांसद से ‘रिश्तेदारी’ की चर्चा
इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। चर्चा है कि आरोपी डीपीआरओ बनवारी लाल सपा सांसद के समधी हैं। इसी रसूख के चलते वे पिछले करीब तीन वर्षों से इटावा विकास भवन में ही जमे हुए हैं। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा के मीडिया प्रभारी रोहित शाक्य ने इसे प्रमुखता से उठाते हुए सरकार और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भ्रष्टाचार के पुराने आरोप और शिकायत


शिकायतकर्ता सतेंद्र सिंह के मुताबिक, डीपीआरओ के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें नई नहीं हैं। उन्होंने बताया कि:
10 जनवरी 2026 को प्रमुख सचिव को हलफनामे (Affidavit) के साथ शिकायत भेजी गई थी।
आरोप है कि डीपीआरओ कथित ‘सेटिंग’ के जरिए हर बार कार्रवाई रुकवा देते थे।
ग्राम प्रधानों और सचिवों का आरोप है कि उन्हें डरा-धमका कर लगातार वसूली की जाती थी।
सफाई कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी भारी अनियमितता बरती जा रही है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

हाल के दिनों में ग्राम प्रधानों और सचिवों ने इन धांधलियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन भी किया था, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब रंगे हाथों रिश्वत लेने का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद शासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलने वाली सरकार इस रसूखदार अधिकारी पर शिकंजा कसेगी?


