आशीष श्रीवास्तव
इटावा। जनपद के डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल की इमरजेंसी में हृदय रोग और गंभीर स्थिति में काम आने वाले जीवनरक्षक इंजेक्शन एक्सपायर (समय सीमा समाप्त) पाए गए। मामला उजागर होते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) ने मामले की जांच के आदेश देते हुए दोषियों को नोटिस जारी करने की बात कही है।

वृद्ध महिला के इलाज के दौरान खुली पोल
लापरवाही का यह मामला शुक्रवार को तब सामने आया जब इमरजेंसी में एक वृद्ध महिला को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने उपचार के लिए तत्काल इंजेक्शन लगाने का निर्देश दिया। जब कंपाउंडर ने इंजेक्शन उठाया, तो उस पर दर्ज ‘एक्सपायरी डेट’ निकल चुकी थी। मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों ने जब इन एक्सपायर इंजेक्शनों को कैमरे में कैद किया, तो वहां मौजूद स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए।

आनन-फानन में हटाया गया स्टॉक
इमरजेंसी में एट्रोपिन (ATROPINE) और एड्रोप्रो (ADROPRO) जैसे महत्वपूर्ण इंजेक्शन एक्सपायर हालत में मिले। ये इंजेक्शन आमतौर पर हार्ट अटैक या पल्स रेट गिरने जैसी आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को दिए जाते हैं। पोल खुलते ही इमरजेंसी स्टाफ आनन-फानन में एक्सपायर दवाओं के स्टॉक को छिपाने और हटाने में जुट गया। हैरानी की बात यह रही कि वहां मौजूद कर्मचारी और डॉक्टर इस गंभीर चूक पर संतोषजनक जवाब देने के बजाय इसे टालते नजर आए।

सीएमएस ने दिए जांच के आदेश
पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए सीएमएस डॉ. परितोष शुक्ला ने बताया कि अस्पताल के पास नई तारीख के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने आश्चर्य जताया कि पुराने स्टॉक को इमरजेंसी से हटाया क्यों नहीं गया।
“यह गंभीर लापरवाही है। चीफ फार्मासिस्ट को तत्काल इमरजेंसी भेजकर एक्सपायर इंजेक्शनों को हटवा दिया गया है। संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किया जा रहा है और इस बात की जांच की जा रही है कि एक्सपायर स्टॉक वहां कैसे मौजूद रहा। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।“
— डॉ. परितोष शुक्ला, सीएमएस
सरकारी दावों पर उठे सवाल
एक तरफ प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक और बेहतर बनाने के दावे कर रही है, वहीं जिला अस्पताल की इमरजेंसी जैसे संवेदनशील विभाग में एक्सपायर दवाओं का मिलना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाता, तो किसी मरीज की जान भी जा सकती थी।


