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अपनों के सितम से अंधेरे में विधवा और मासूम

बिजली-पानी काटकर घर से निकालने की साजिश का आरोप

उवैश चौधरी /आशीष श्रीवास्तव

​इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक विधवा सरकारी महिला कर्मचारी को अपने ही पुश्तैनी मकान में बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। पिछले तीन दिनों से पीड़िता का पूरा परिवार अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर है।

मोमबत्ती की रोशनी में भविष्य तलाश रहे मासूम

​पीड़िता अर्पणा सिंह, पत्नी स्वर्गीय वीर विक्रम सिंह, अपने बेटे और बेटी के साथ फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित मकान में रहती हैं। पति की मृत्यु के बाद वह मृतक आश्रित कोटे में सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। आरोप है कि पारिवारिक विवाद के चलते उनके घर की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई है। स्थिति इतनी विकट है कि कड़ाके की ठंड के बीच बच्चे मोमबत्ती जलाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

​जेठ पर मारपीट और उत्पीड़न का आरोप

​पीड़िता अर्पणा सिंह ने अपने जेठ अनूप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अर्पणा का कहना है कि:

​जेठ आए दिन उनके और बच्चों के साथ गाली-गलौज और मारपीट करते हैं।

​घर में रखा सामान तोड़ दिया जाता है और जान से मारने की धमकी दी जाती है।

​5 जनवरी 2026 को जेठ ने जबरन घर की बिजली कटवा दी और पानी भरने से रोक दिया।

प्रशासन की चौखट पर न्याय की गुहार

​अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरी हुई पीड़िता ने गुरुवार को जिलाधिकारी (DM) और एसएसपी (SSP) इटावा से मुलाकात की। उन्होंने प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की है। हालांकि, मामला पुश्तैनी मकान और पारिवारिक विवाद से जुड़ा होने के कारण पुलिस और प्रशासन के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं (बिजली-पानी) के अभाव ने मानवीय संवेदनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

असुरक्षा के साये में परिवार

​पीड़िता का कहना है कि पति की मौत के बाद से ही वह मानसिक और सामाजिक दबाव में थीं, लेकिन अब उनके और उनके बच्चों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। आसपास के लोगों की मदद से जैसे-तैसे पानी का इंतजाम हो रहा है, लेकिन घर में पसरा अंधेरा और जेठ की धमकियां उन्हें दहशत में जी रही हैं।

​पीड़िता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द बिजली-पानी बहाल कराया जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बेबस मां और बच्चों को कब तक न्याय दिला पाता है।

 

Ashish Srivastav

Written by Ashish Srivastav

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