
इटावा में रियल मनी फैंटेसी महादेव एप से जुड़े एक बड़े ऑनलाइन गेमिंग फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पुलिस ने तीन दिन तक चली धर पकड़ के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन मजबूत साक्ष्य न जुटा पाने के कारण न्यायालय ने गुरुवार दिन में तीनों को जमानत पर रिहा कर दिया। पुलिस अब आरोपियों की अवैध कमाई से बनाई गई चल अचल और बेनामी संपत्तियों की जांच करने और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का दावा कर रही है, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। तीनों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अक्षयराज भदौरिया ने अपना पक्ष मजबूती से रखा और तीनों आरोपियों को न्यायालय ने जमानत दे दी।
पुलिस के अनुसार इटावा से पकड़े गए आरोपियों में वासु भदोरिया, संस्कार यादव और मनन शुक्ला शामिल हैं। इन तीनों पर आरोप है कि इन्होंने महादेव एप की फ्रेंचाइजी लेकर ऑनलाइन गेम और फेक बिट कॉइन के माध्यम से लोगों को पहले छोटी रकम जिताकर जीतने की लत लगाई और फिर बड़ी रकम लगवाने के बाद तकनीक के जरिए उन्हें हार में बदल दिया। यह पूरा काम लंबे समय से चल रहा था और कई लोग इनके जाल में फंस चुके थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि वासु भदोरिया बीएससी गणित पास है, संस्कार यादव 12वीं पास है और मनन शुक्ला बीएससी पास है।
मनन शुक्ला शुरुआत के दौर में मुंबई गया था, जहां वह करीब 15 हजार रुपये की नौकरी के साथ महादेव एप के संचालन की ट्रेनिंग ले रहा था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह इटावा लौट आया और यहीं से महादेव एप की फ्रेंचाइजी लेकर संचालन शुरू कर दिया।
सूत्रों की मानें तो यह तीनों आरोपी और इनके अन्य साथी लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को फंसाने का काम कर रहे थे और अब तक मोटी रकम कमा चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस इनके पास से न तो बड़ी नकदी बरामद कर सकी और न ही ऐसे ठोस दस्तावेज या तकनीकी साक्ष्य जुटा पाई, जिससे कोर्ट में आरोप मजबूत हो पाते। इसी का नतीजा रहा कि जब पुलिस ने गुरुवार को आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, आरोपियों के अधिवक्ता अक्षयराज भदौरिया ने पैरवी करते हुए मजबूत पक्ष रखा, तो अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।
क्षेत्राधिकारी नगर अभय नारायण राय ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दावा किया कि वे पहले इस काम में सक्रिय थे, लेकिन काफी समय से इसे बंद कर चुके थे। इसी कारण उनके पास से ज्यादा कुछ बरामद नहीं हो सका। हालांकि, आरोपियों के मोबाइल फोन में महादेव एप मिलने के बाद ही उनकी गिरफ्तारी की गई थी।
पुलिस का कहना है कि जमानत मिलने के बाद भी जांच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आरोपियों द्वारा अवैध कमाई से अर्जित की गई चल अचल और बेनामी संपत्तियों की जांच की जाएगी। साथ ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। इस मामले में फरार बताए जा रहे मुख्य आरोपी अंकित तिवारी की तलाश लगातार जारी है और पुलिस का दावा है कि जो भी व्यक्ति इस फर्जीवाड़े में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


